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गुरु वल्लभ की जन्मभूमि बड़ौदा नगरे श्री दादा पार्श्वनाथ जिनालय 101वीं ध्वजारोहण निमित्ते जिनेन्द्र भक्ति स्वरूप अष्टान्ह्किा महोत्सव
BY navyugnirmata / February 14, 2018
श्रावक शब्द के ‘व’ अक्षर के अनुसार श्रावक को वर्चस्वशील होना चािहये। वर्चस्व हाता है आत्म शक्ति का। श्रावक की आत्मशक्ति निरंतर अभिविर्धत होती रहनी चाहिये कि उसका वर्चस्व लगातार विस्तृत होता जायेगा। हमें यह सोचना है कि हमारा वर्चस्व कैसा है, आत्मशक्ति कितनी है और शौर्य कैसा है, शौर्य होता है सत्य और शील का। सत्य का अनुसरण हो तथा शील का पालन, तब शौर्य साहस का अभाव नहीं रहता है। आज तो छोटी-छोटी बात के लिये सत्य को दांव पर लगा दिया जाता है और धर्म की कसमें खानी शुरू हो जाती हैं। जैसे कि सत्यशील, धर्म ये सब कत्र्तव्य नहीं, खिलौने हों।
आज महासुदि 5, दिनांक 22.1.2018, सोमवार को प्रातः 8ः30 जिनमंदिर में अठारह अभिषेक सम्पन्न हुए। रात्रि में भक्ति भावना हुई।
आज महाशुदि 6, दिनांक 23.1.2018, मंगलवार को दोपहर 2ः00 बजे श्री बारहव्रतनी पूजा व रात्रि 8ः00 बजे भक्ति भावना में रंगारंग भक्ति नृत्य व नाट्य मंचन हुआ।
पूज्यपाद श्री जी का मंगलप्रवेश व ध्वजारोहण का भव्य वरघोड़ा
मनुष्य का वर्तमान जीवन अधिकाधिक जटिल होता जा रहा है। जटिलता जितनी फैलती है, कुटिलता उतनी ही बढ़ती है। आज का जीवन गांठ गठीला हो गया है। विचार-विचार में गांठ, वचन-वचन में गांठ और व्यवहार-व्यवहार में गांठ तो सरलता किधर से प्रवेश करेगी और प्रकृति में सौम्यता कैसे बचेगी। ये गांठें चाहे शरीर में हो, मन में या आत्मा में-उनके गुणों का घात करती रहती हैं।
आज महाशुदि 7, दिनांक 24.1.2018; बुधवार को प्रातः 9ः00 बजे पूज्य श्री जी, परम पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय विद्युतरत्न सूरीश्वर जी म.सा., प्रवर्तक मुनिराज श्री विनोद विजय जी म.सा. आदि साधु-साध्वीवृंद व ध्वजा का भव्य वरघोड़ा कोठीपोल से प्रारम्भ हुआ।
सर्वप्रथम 5 बग्गियां, जिसमें 4 बग्गियां में अलग-अलग ध्वजाएं, एक बग्गी में श्री दादा पाश्र्वनाथ भगवान की छवि, फिर बैंड, पूज्य श्री जी आदि साधुवृंद, सैंकड़ों की संख्या में श्रावकगण, साध्वीवृंद, श्राविकागण आदि वरघोड़ा नगर के मुख्यमार्गों से होता हुआ नरसिंह जी पोल स्थित दादा पाश्र्वनाथ जिनालय पहुंचा। परमात्मा के दर्शन करके प्रवचन मण्डप में पधारे।
पूज्य श्री जी के मंगलाचरण के साथ धर्मसभा प्रारम्भ हुई। बहनों के मण्डल ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। पूज्य श्री जी ने प्रवचन में फरमाया - मेरा सौभाग्य है कि दादा पाश्र्वनाथ जिनालय की 101वीं ध्वजारोहण पर उपस्थित रहने का गुरु भूमि पर अवसर मिला। ‘कर लिया सो काम, भज लिया सो राम’। समय रहते संकल्प के साथ कठिन से कठिन कार्य तो सिद्ध किया जा सकता है परन्तु यदि समय गंवा दिया, फिर कुछ नहीं हो सकता है। बीता हुआ समय और पाया हुआ मनुष्य जन्म फिर नहीं मिलेगा। पुरुषादानीय पाश्र्वनाथ भगवान का आदेश नाम कर्म होने के कारण इस जगत् में पूजनीय है, विघ्नहत्र्ता है। जीवन में अवसर मिला है इसका सदुपयोग करके समय को सार्थक करें। 101वीं ध्वजा का अनमोल अवसर, हम सौभाग्यशाली है ध्वजारोहण का प्रसंग हमें निहारने को मिला है। मुख्य ध्वजा के लाभार्थी श्री सत्येन्द्र भाई अंबालाल झवेरी परिवार के अलावा तीन ध्वजाओं के चढ़ावे भी हुए। साथ में यात्रिक भवन, मेन गेट, यात्रिक हाॅल, पेढ़ी, श्रावक, यात्रिक रूम, श्राविका यात्रिक रूम, पुजारी रूम आदि के भी चढ़ावे सम्पन्न हुए।
दोपहर 12ः30 बजे संघ स्वामी वात्सल्य हुआ। दोपहर 2ः00 बजे श्री गिरनार तीर्थ 99 प्रकार की पूजा व रात्रि 8ः00 बजे भक्ति भावना सम्पन्न हुई।
आज महाशुदि 8, दिनांक 25.1.2018, गुरुवार को प्रातः शुभ मुहूर्त में कुंभ स्थापना, दीपक स्थापना व ज्वारारोपण हुआ। दोपहार 2ः00 बजे श्री पाश्र्वनाथ पंचकल्याणक पूजा व रात्रि 8ः00 बजे भक्ति भावना हुई।
आज महाशुदि 9, दिनांक 26.1.2018; शुक्रवार को प्रातः 6ः00 बजे श्री जिनमंदिर में प्रभु मिलन का कार्यक्रम हुआ। दोपहर 2ः00 बजे श्री नवपद जी पूजा व रात्रि 8ः00 बजे भक्ति भावना हुई।
धर्म-दर्शन, संस्कृति, इन सबका एक ही उद्देश्य है कि मानव को सही जीवन दृष्टि मिले लेकिन वर्तमान संदर्भ में यह निश्चय करने के लिये कि कैसी जीवन दृष्टि सही होती है और कौन-सी गलत-इसके लिये ज्ञान व विवेक की आवश्यकता है तथा उससे ऊपर गुणशीलता की।
आज महाशुदि 10, दिनांक 27.1.2018; शनिवार को प्रातः 9ः00 बजे नवग्रह, दशदिक्पाल व अष्टमंगल, पाटला पूजन सम्पन्न हुआ।
आत्म मलीनता के परिष्कार तथा स्वरूप संस्कार के कार्य का यही समय है। यह कार्य केवल मानव जीवन में संभव है। मानव गहराई से सोचे, विवेकपूर्वक समझे और आत्म-साधना में जुटने का संकल्प करें तो विकृत वृत्तियों का परिष्कार, दुष्प्रवृत्तियों का सुधार तथा शक्तियों का संस्कार किया जा सकता है। इस जीवन का जो समय व्यर्थ गया उसे भूल जायें और शेष जीवन का सम्पूर्ण सदुपयोग कर लें।
आज महाशुदि 11, दिनांक 28.1.2018; रविवार को प्रातः 10ः00 बजे श्री लघु शांति स्नात्र महापूजन सम्पन्न हुआ। सायं 6ः00 बजे बहनों के द्वारा की गई अलग-अलग 108 गहुंलियों की प्रदर्शिनी के साथ दर्शन हुए। रात्रि भक्ति भावना सम्पन्न हुई।
जब तक अपने दोषों और अपने बुरे व्यवहार को नहीं देखेंगे, तब तक अपना सुधार नहीं होगा। जो अपना सुधार नहीं कर सकता है, वह भला दूसरों को कैसे सुधार सकता है। वर्तमान की विडम्बना यह है कि आज व्यक्ति अपने को बदलना नहीं चाहता, सिर्फ दूसरों में बदलाव लाना चाहता है। इस तरह दूसरों में बदलाव नहीं लाया जा सकता। सोचे और सोचते रहो कि पहले मुझे अपने आपको बदलना है ?
आज महाशुदि 13, दिनांक 20.1.2018; सोमवार को प्रातः शुभ मुहूर्त में सत्तरभेदी पूजा की 9वीं पूजा के बाद ¬ पुण्याहं....पुण्याहं..प्रियतांम-प्रियंताम् के जयघोष के साथ दादा पाश्र्वनाथ जिनालय की 101वीं ध्वजारोहण चतुर्विध संघ की हज़ारों की जनमेदनी के बीच किया गया।
दोपहर 11ः30 बजे श्रीसंघ का स्वामी वात्सल्य हुआ। रात्रि में भक्ति भावना सम्पन्न हुई।
जीर्णोद्धारित श्री वासुपूज्य जिनालय में प्रतिष्ठा सम्बन्धित चढ़ावे सम्पन्न 
अपने वर्तमान को सजग होकर देखने-परखने तथा बदलने-सुधारने से व्यक्ति के सही चारित्र का निर्माण होता तथा उसकी बुद्धि आध्यात्मिक दृष्टि से जागृत बनती है और राग-द्वेष के भावों से लिप्त नहीं होता। तब उसका विचार, वचन और व्यवहार सम्यक् होता चला जाता है।
आज माघ शुदि 12, दिनांक 28.1.2018; रविवार को दोपहर 2ः30 बजे पूज्य श्री जी, पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय विद्युतरत्न विजय जी म.सा., प्रवर्तक मुनिराज श्री विनोद विजय जी म.सा. की शुभ निश्रा में श्री आत्मानंद जैन उपाश्रय जानीशेरी बड़ौदा में जीर्णोद्धारित श्री वासुपूज्य जिनमंदिर जम्बूसर के प्रतिष्ठा के चढ़ावे बड़े ही उत्साह-उमंग के साथ सम्पन्न हुए।